बुन्देलखण्ड का साहित्य एवं लोकगीत भारतीय लोक-परम्परा का अमूल्य धरोहर हैं। यह शोध-पत्र बुन्देलखण्ड के लिखित साहित्य (केशवदास, तुलसीदास, मैथिलीशरण गुप्त) एवं अलिखित लोकगीतों (सोहर, विवाह, फाग, वनवास, केवट, शबरी आदि) में श्रीराम के बहुआयामी व्यक्तित्व का विश्लेषण करता है। अध्ययन में ओरछा के 'राजा राम' की परम्परा, 'गारी' गीतों की हास्य-व्यंग्य शैली, केवट-प्रसंग की भक्ति-विवशता, तथा बुन्देली फागों में शृंगार और भक्ति के अद्वितीय समन्वय को रेखांकित किया गया है। निष्कर्षतः बुन्देलखण्ड के साहित्य में राम केवल देवता नहीं, बल्कि 'लाल' (पुत्र), 'पाहुन' (दामाद), 'राजा', 'योद्धा' एवं 'तपस्वी' के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
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IRE Journals:
डॉ. सीमा श्रीवास्तव "बुन्देलखण्ड के लोकसाहित्य एवं लोकगीतों में श्रीराम: एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विमर्श" Iconic Research And Engineering Journals Volume 2 Issue 1 2018 Page 179-183 https://doi.org/10.64388/IREV2I1-1716298
IEEE:
डॉ. सीमा श्रीवास्तव
"बुन्देलखण्ड के लोकसाहित्य एवं लोकगीतों में श्रीराम: एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विमर्श" Iconic Research And Engineering Journals, 2(1) https://doi.org/10.64388/IREV2I1-1716298