International Peer-Reviewed JournalOpen AccessISSN 2456-8880
irejournals@gmail.com+91-7433024337

Home / Current Issue / Paper 1716298

1716298PublishedVol 2 · Issue 1

बुन्देलखण्ड के लोकसाहित्य एवं लोकगीतों में श्रीराम: एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विमर्श

डॉ. सीमा श्रीवास्तव

Subject area: Arts, Social Sciences and Humanities  ·  Area of research: लोकसाहित्य एवं लोकगीत

DOI: https://doi.org/10.64388/IREV2I1-1716298

Abstract

बुन्देलखण्ड का साहित्य एवं लोकगीत भारतीय लोक-परम्परा का अमूल्य धरोहर हैं। यह शोध-पत्र बुन्देलखण्ड के लिखित साहित्य (केशवदास, तुलसीदास, मैथिलीशरण गुप्त) एवं अलिखित लोकगीतों (सोहर, विवाह, फाग, वनवास, केवट, शबरी आदि) में श्रीराम के बहुआयामी व्यक्तित्व का विश्लेषण करता है। अध्ययन में ओरछा के 'राजा राम' की परम्परा, 'गारी' गीतों की हास्य-व्यंग्य शैली, केवट-प्रसंग की भक्ति-विवशता, तथा बुन्देली फागों में शृंगार और भक्ति के अद्वितीय समन्वय को रेखांकित किया गया है। निष्कर्षतः बुन्देलखण्ड के साहित्य में राम केवल देवता नहीं, बल्कि 'लाल' (पुत्र), 'पाहुन' (दामाद), 'राजा', 'योद्धा' एवं 'तपस्वी' के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

Keywords

बुन्देलखण्ड, बुन्देली लोकगीत, श्रीराम, केशवदास, रामचंद्रिका, साकेत, सोहर, फाग, ओरछा, केवट, गारी

How to cite this paper

डॉ. सीमा श्रीवास्तव "बुन्देलखण्ड के लोकसाहित्य एवं लोकगीतों में श्रीराम: एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विमर्श" Iconic Research And Engineering Journals Volume 2 Issue 1 2018 Page 179-183 https://doi.org/10.64388/IREV2I1-1716298
डॉ. सीमा श्रीवास्तव "बुन्देलखण्ड के लोकसाहित्य एवं लोकगीतों में श्रीराम: एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विमर्श" Iconic Research And Engineering Journals, vol. 2, no. 1, Jul. 2018, doi: https://doi.org/10.64388/IREV2I1-1716298
डॉ. सीमा श्रीवास्तव (2018). बुन्देलखण्ड के लोकसाहित्य एवं लोकगीतों में श्रीराम: एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विमर्श. Iconic Research And Engineering Journals, 2(1). doi: https://doi.org/10.64388/IREV2I1-1716298
डॉ. सीमा श्रीवास्तव "बुन्देलखण्ड के लोकसाहित्य एवं लोकगीतों में श्रीराम: एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विमर्श" Iconic Research And Engineering Journals, vol. 2, no. 1, Jul. 2018. Crossref, https://doi.org/10.64388/IREV2I1-1716298
@article{1716298,
      author = {डॉ. सीमा श्रीवास्तव},
      title = {बुन्देलखण्ड के लोकसाहित्य एवं लोकगीतों में श्रीराम: एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विमर्श},
      journal = {Iconic Research And Engineering Journals},
      year = {2018},
      volume = {2},
      number = {1},
      pages = {179-183},
      issn = {2456-8880},
      url = {https://www.irejournals.com/formatedpaper/1716298.pdf},
      abstract = {बुन्देलखण्ड का साहित्य एवं लोकगीत भारतीय लोक-परम्परा का अमूल्य धरोहर हैं। यह शोध-पत्र बुन्देलखण्ड के लिखित साहित्य (केशवदास, तुलसीदास, मैथिलीशरण गुप्त) एवं अलिखित लोकगीतों (सोहर, विवाह, फाग, वनवास, केवट, शबरी आदि) में श्रीराम के बहुआयामी व्यक्तित्व का विश्लेषण करता है। अध्ययन में ओरछा के 'राजा राम' की परम्परा, 'गारी' गीतों की हास्य-व्यंग्य शैली, केवट-प्रसंग की भक्ति-विवशता, तथा बुन्देली फागों में शृंगार और भक्ति के अद्वितीय समन्वय को रेखांकित किया गया है। निष्कर्षतः बुन्देलखण्ड के साहित्य में राम केवल देवता नहीं, बल्कि 'लाल' (पुत्र), 'पाहुन' (दामाद), 'राजा', 'योद्धा' एवं 'तपस्वी' के रूप में प्रतिष्ठित हैं।},
      keywords = {बुन्देलखण्ड, बुन्देली लोकगीत, श्रीराम, केशवदास, रामचंद्रिका, साकेत, सोहर, फाग, ओरछा, केवट, गारी},
      month = {July},
      doi = {https://doi.org/10.64388/IREV2I1-1716298}
  }