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बाड़मेर जिले में डेयरी उद्योग की संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ
Subject area: Science,Engineering and Technology · Area of research: Geography
DOI: https://doi.org/10.64388/IREV9I12-1719040
Abstract
बाड़मेर जिला राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थित है, जहाँ कृषि की तुलना में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अधिक महत्वपूर्ण आधार रहा है। जिले की भौगोलिक एवं जलवायवीय परिस्थितियाँ कृषि उत्पादन को सीमित करती हैं, किंतु पशुधन संपदा की प्रचुरता डेयरी उद्योग के विकास की व्यापक संभावनाएँ प्रस्तुत करती है। वर्तमान समय में दुग्ध उत्पादन ग्रामीण परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत बनता जा रहा है। बाड़मेर जिले में गाय, भैंस, बकरी एवं ऊँट आधारित पशुपालन की समृद्ध परंपरा रही है, जो डेयरी क्षेत्र को मजबूत आधार प्रदान करती है। यद्यपि डेयरी उद्योग में पर्याप्त संभावनाएँ विद्यमान हैं, फिर भी जल संकट, चारे की कमी, पशु स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, आधुनिक तकनीकों की सीमित उपलब्धता तथा विपणन संबंधी समस्याएँ इसके विकास में बाधक हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र में बाड़मेर जिले में डेयरी उद्योग की वर्तमान स्थिति, विकास की संभावनाओं तथा प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि उचित सरकारी सहयोग, सहकारी डेयरी व्यवस्था, आधुनिक प्रबंधन तकनीकों एवं दुग्ध प्रसंस्करण सुविधाओं के विकास द्वारा डेयरी उद्योग को जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त आधार बनाया जा सकता है।
Keywords
डेयरी उद्योग, बाड़मेर, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सहकारी डेयरी, मरुस्थलीय क्षेत्र।
How to cite this paper
@article{1719040,
author = {Akha Ram},
title = {बाड़मेर जिले में डेयरी उद्योग की संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ},
journal = {Iconic Research And Engineering Journals},
year = {2026},
volume = {9},
number = {12},
pages = {1967-1969},
issn = {2456-8880},
url = {https://www.irejournals.com/formatedpaper/1719040.pdf},
abstract = {बाड़मेर जिला राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थित है, जहाँ कृषि की तुलना में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अधिक महत्वपूर्ण आधार रहा है। जिले की भौगोलिक एवं जलवायवीय परिस्थितियाँ कृषि उत्पादन को सीमित करती हैं, किंतु पशुधन संपदा की प्रचुरता डेयरी उद्योग के विकास की व्यापक संभावनाएँ प्रस्तुत करती है। वर्तमान समय में दुग्ध उत्पादन ग्रामीण परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत बनता जा रहा है। बाड़मेर जिले में गाय, भैंस, बकरी एवं ऊँट आधारित पशुपालन की समृद्ध परंपरा रही है, जो डेयरी क्षेत्र को मजबूत आधार प्रदान करती है। यद्यपि डेयरी उद्योग में पर्याप्त संभावनाएँ विद्यमान हैं, फिर भी जल संकट, चारे की कमी, पशु स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, आधुनिक तकनीकों की सीमित उपलब्धता तथा विपणन संबंधी समस्याएँ इसके विकास में बाधक हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र में बाड़मेर जिले में डेयरी उद्योग की वर्तमान स्थिति, विकास की संभावनाओं तथा प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि उचित सरकारी सहयोग, सहकारी डेयरी व्यवस्था, आधुनिक प्रबंधन तकनीकों एवं दुग्ध प्रसंस्करण सुविधाओं के विकास द्वारा डेयरी उद्योग को जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त आधार बनाया जा सकता है।},
keywords = {डेयरी उद्योग, बाड़मेर, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सहकारी डेयरी, मरुस्थलीय क्षेत्र।},
month = {June},
doi = {https://doi.org/10.64388/IREV9I12-1719040}
}