Current Volume 9
पत्र भारतीय ज्ञान प्रणाली में निहित प्रकृति संरक्षण की अवधारणाओं तथा आधुनिक भारतीय पर्यावरण कानूनों के मध्य संबंधों का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। भारतीय संस्कृति में प्रकृति को केवल भौतिक संसाधन नहीं बल्कि जीवन, धर्म और संस्कृति का अभिन्न अंग माना गया है। वेद, उपनिषद, स्मृतियाँ तथा अन्य प्राचीन ग्रंथ पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर विशेष बल देते हैं। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण, वनों के विनाश तथा जैव विविधता के ह्रास जैसी समस्याएँ वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी हैं। इन समस्याओं के समाधान हेतु आधुनिक पर्यावरण कानूनों का विकास हुआ है। प्रस्तुत शोध का उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली में निहित पर्यावरणीय मूल्यों का अध्ययन करना तथा यह विश्लेषण करना है कि वे आधुनिक पर्यावरणीय न्यायशास्त्र और विधिक ढाँचे को किस प्रकार सुदृढ़ बना सकते हैं। अध्ययन में गुणात्मक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति का प्रयोग किया गया है। निष्कर्षतः यह पाया गया है कि भारतीय ज्ञान प्रणाली के सिद्धांत—जैसे पंचमहाभूत, वसुधैव कुटुम्बकम्, अहिंसा तथा प्रकृति के प्रति सम्मान—आधुनिक पर्यावरण कानूनों एवं सतत विकास की अवधारणा को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भारतीय ज्ञान प्रणाली, पर्यावरण कानून, पर्यावरणीय न्यायशास्त्र, सतत विकास, जैव विविधता ।
IRE Journals:
अनिल साकेत, श्री शशिकांत दुबे, डॉ. सुधीर कुमार जैन "भारतीय ज्ञान प्रणाली में प्रकृति संरक्षण की अवधारणा और आधुनिक पर्यावरण कानून: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन" Iconic Research And Engineering Journals Volume 9 Issue 12 2026 Page 2139-2145 https://doi.org/10.64388/IREV9I12-1719068
IEEE:
अनिल साकेत, श्री शशिकांत दुबे, डॉ. सुधीर कुमार जैन
"भारतीय ज्ञान प्रणाली में प्रकृति संरक्षण की अवधारणा और आधुनिक पर्यावरण कानून: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन" Iconic Research And Engineering Journals, 9(12) https://doi.org/10.64388/IREV9I12-1719068