Current Volume 9
इस शोध कार्य के माध्यम से हम विज्ञापनों के उस अनोखे सफर को करीब से देखते है जिसने बदलते वक्त के साथ खुद को पूरी तरह से नया रूप दे दिया है। विज्ञापन का यह क्रमिक विकास (Evolution) सिर्फ बाज़ार की किसी तकनीक का बदलना नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की बदलती सोच और व्यवहार की एक कहानी है। कहाँ कभी विज्ञापन पत्थरों की नक्काशी या बाजारों में ढोल बजाकर दी जाने वाली 'मुनादी' तक सीमित थे, और आज वे हमारे स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और AI की डिजिटल दुनिया में इस कदर रच-बस गए हैं कि हमारी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुके हैं। यह अध्ययन इसी बात पर रोशनी डालता है कि कैसे तकनीक के साथ-साथ विज्ञापन के कहने का अंदाज़ और उसे पेश करने की कला बदली है। अंत में, यह कार्य विज्ञापन की उस रचनात्मकता (Creativity) और टेक्नोलॉजी के अद्भुत मेल को सामने लाता है, जो व्यापार के साथ साथ, हमारे सोचने और समाज को देखने के नज़रिए को भी एक नई दिशा दे रहे हैं।
विज्ञापन, जनसंचार, सोशल मीडिया मार्केटिंग, मानवीय दृष्टिकोण
IRE Journals:
Saijal Goel , Mayank Saini, Rajnikant "Evolution of Advertising" Iconic Research And Engineering Journals Volume 9 Issue 12 2026 Page 1939-1943 https://doi.org/10.64388/IREV9I12-1719026
IEEE:
Saijal Goel , Mayank Saini, Rajnikant
"Evolution of Advertising" Iconic Research And Engineering Journals, 9(12) https://doi.org/10.64388/IREV9I12-1719026