वर्तमान परिप्रेक्ष्य में नारी की दशा एवं दिशा का आंचलिक उपन्यासों में प्रतिबिम्ब: बुन्देलखण्ड के विशेष संदर्भ में
  • Author(s): डॉ. सीमा श्रीवास्तव
  • Paper ID: 1716341
  • Page: 386-389
  • Published Date: 30-11-2020
  • Published In: Iconic Research And Engineering Journals
  • Publisher: IRE Journals
  • e-ISSN: 2456-8880
  • Volume/Issue: Volume 4 Issue 5 November-2020
Abstract

बुन्देलखण्ड का क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टि से वीरता, सामन्तवाद, और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक रहा है, किन्तु आधुनिक परिप्रेक्ष्य में यह उपेक्षा, गरीबी, और सामाजिक विसंगतियों से जूझ रहा है। हिन्दी साहित्य के आंचलिक उपन्यासों ने इस यथार्थ को सबसे अधिक सजीवता से अभिव्यक्त किया है। प्रस्तुत शोध-पत्र में अभिक्रा प्रसाद 'दिव्य' के उपन्यास प्रेम तपस्वी तथा डॉ॰ वृन्दावन लाल वर्मा के प्रमुख सामाजिक उपन्यासों (लगन, प्रत्यागत, कुण्डली चक्र, अचल मेरा कोई, उदय-किरण) के माध्यम से बुन्देलखण्ड की लोक संस्कृति, नारी की दशा, जातीय पाखण्ड, पुनर्विवाह, प्रेम विवाह, तथा खड़ी बोली और बुन्देली के द्वन्द्व का तुलनात्मक मूल्यांकन किया गया है। शोध-निष्कर्ष यह है कि ये रचनाएँ केवल क्षेत्रीय दस्तावेज न होकर समग्र हिन्दी साहित्य को सामाजिक चेतना और भाषाई विविधता की दिशा प्रदान करती हैं।

Keywords

आंचलिक उपन्यास, बुन्देलखण्ड, लोक संस्कृति, नारी दशा, पुनर्विवाह, डॉ॰ वृन्दावन लाल वर्मा, अभिक्रा प्रसाद 'दिव्य', खड़ी बोली, बुन्देली, सामाजिक यथार्थवाद।

Citations

IRE Journals:
डॉ. सीमा श्रीवास्तव "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में नारी की दशा एवं दिशा का आंचलिक उपन्यासों में प्रतिबिम्ब: बुन्देलखण्ड के विशेष संदर्भ में" Iconic Research And Engineering Journals Volume 4 Issue 5 2020 Page 386-389 https://doi.org/10.64388/IREV4I5-1716341

IEEE:
डॉ. सीमा श्रीवास्तव "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में नारी की दशा एवं दिशा का आंचलिक उपन्यासों में प्रतिबिम्ब: बुन्देलखण्ड के विशेष संदर्भ में" Iconic Research And Engineering Journals, 4(5) https://doi.org/10.64388/IREV4I5-1716341