वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के विस्तार ने शिक्षण-अधिगम की प्रक्रियाओं को गहन रूप से प्रभावित किया है। इस अध्ययन में माध्यमिक आँकड़ों के विश्लेषण द्वारा शैक्षिक प्रौद्योगिकी तथा ऑनलाइन शिक्षा के बढ़ते प्रभाव का आकलन किया गया है। महामारी के दौर में जहाँ शिक्षण संस्थानों को ऑनलाइन माध्यम अपनाने पड़े, वहीं यह परिवर्तन शिक्षा व्यवस्था में एक दीर्घकालिक बदलाव का कारक बन गया। अध्ययन में पाया गया है कि शैक्षिक प्रौद्योगिकी के प्रयोग से शिक्षार्थियों को अधिगम में नई गुणवत्ता और लचीलापन प्राप्त हुआ है, साथ ही शिक्षा का डिजिटलकरण उच्च शिक्षा से लेकर स्कूली स्तर तक व्यापक रूप से बढ़ा है। दूसरी ओर, डिजिटल विभाजन, तकनीकी अवसंरचना की कमी, शिक्षक प्रशिक्षण की आवश्यकता और ऑनलाइन माध्यम में व्यक्तिगत संपर्क व मूल्यांकन की सीमाएँ जैसी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। भारतीय संदर्भ में सरकार द्वारा ऑनलाइन मंच (जैसे SWAYAM, DIKSHA) विकसित कर शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने के प्रयास हुए हैं, परंतु ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों तक डिजिटल शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित करना अभी भी एक महत्वपू्र्ण मुद्दा है। अध्ययन निष्कर्ष स्वरूप यह स्पष्ट होता है कि शैक्षिक प्रौद्योगिकी एवं ऑनलाइन शिक्षा का प्रभाव भविष्य में और भी व्यापक होगा, बशर्ते चुनौतियों के समाधान हेतु ठोस नीतिगत एवं व्यवहारिक कदम उठाए जाएँ। इस शोध के परिणाम शिक्षा नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों व तकनीकी विकासकर्ताओं के लिए उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।
शैक्षिक प्रौद्योगिकी, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल शिक्षण, ई-लर्निंग, अधिगम गुणवत्ता, लचीलापन, डिजिटल विभाजन
IRE Journals:
Yogita Gour "शैक्षिक प्रौद्योगिकी और ऑनलाइन शिक्षा का बढ़ता प्रभाव" Iconic Research And Engineering Journals Volume 9 Issue 7 2026 Page 1971-1981 https://doi.org/10.64388/IREV9I7-1713873
IEEE:
Yogita Gour
"शैक्षिक प्रौद्योगिकी और ऑनलाइन शिक्षा का बढ़ता प्रभाव" Iconic Research And Engineering Journals, 9(7) https://doi.org/10.64388/IREV9I7-1713873